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सोमनाथ के प्रमुख पर्यटक स्थानों की सूची, Tourist Places Around Somnath

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Places To Visit in Somnath

Somnath Tourism सोमनाथ, गुजरात टूरिज्म के सबसे खूबसूरत एवं चुनिंदा पर्यटन स्थल में से एक है। सोमनाथ को प्रमुखतया हिंदुओ के प्रसिद्ध तीर्थ स्थान के रूप में माना जाता है। सोमनाथ का शाब्दिक अर्थ है चंद्र का देवता। परिवार और मित्रों के साथ घूमने के लिए सोमनाथ उत्तम स्थान है। यहां पर ऐसे एक कई स्थान है, जहां पर आप घूमने जा सकते है। यहां पर आकर प्रकृति और भक्ति के अनूठे संगम को देखकर आपका मन निश्चित ही प्रफ्फुलित हो उठेगा। वैसे तो घूमने के लिए यहां पर कई स्थान है लेकिन सबसे प्रमुख जगह सोमनाथ मंदिर है।




सोमनाथ मंदिर, भगवान शिव के प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंग में से प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है। सोमनाथ जूनागढ़ से 80 किमी, वेरावल के समीप एवं सौराष्ट्र के काठियावाड़ क्षेत्र के प्रभास में स्थित है।

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सोमनाथ घूमने के लिए उचित समय ( Best Time to Visit in Somnath)

सोमनाथ घूमने के लिए सबसे उचित समय अक्टूबर से लेकर फरवरी तक है।

सोमनाथ के प्रमुख पर्यटक स्थलों की सूची (Places To Visit in Somnath)

सोमनाथ का प्रमुख पर्यटक आकर्षण सोमनाथ मंदिर है। जिसे 8 बार मुगल शासक द्वारा लूटा एवं नष्ट किया गया। सन 1950 में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। सोमनाथ मंदिर के अलावा यहां अन्य कई पर्यटक स्थल है। जो सोमनाथ के आकर्षण का केंद्र है।

  • सोमनाथ का समुद्री किनारा
  • रुद्रेश्वर मंदिर
  • त्रिवेणी घाट
  • पंच पांडव गुफा
  • सूरज मंदिर
  • देहोत्सर्ग तीर्थ
  • गीता मंदिर
  • कामनाथ महादेव मंदिर
  • लक्ष्मीनारायण मंदिर
  • अहिल्याबाई मंदिर
  • परशुराम मंदिर
  • जूनागढ़ गेट
  • भलका तीर्थ
  • प्रभास संग्रहालय
  • मै पूरी मस्जिद
  • सना गुफा

सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple):

सोमनाथ महादेव मंदिर, भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है। सोमनाथ मंदिर को लेकर कई कथाएं प्रचलित है। ऐसा कहा जाता है कि सोमनाथ का निर्माण चंद्रमा द्वारा सोने से किया गया था। उसके बाद रावण ने चांदी से सोमनाथ मंदिर का निर्माण कराया। इसके बाद में भगवान कृष्ण द्वारा लकड़ियों से एवं पत्थरों से भीम द्वारा सोमनाथ मंदिर का निर्माण किया गया।

मुगल शासक महमूद गज़नी द्वारा सोमनाथ मंदिर को 8 बार लूटा व नष्ट किया गया। लेकिन बाद में महारानी अहिल्याबाई होलकर एवं अन्य शिव भक्तों द्वारा पुनः मंदिर का निर्माण कराया गया।

आज़ादी के बाद सन 1950 में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ महादेव मंदिर का पुनर्निर्माण निर्माण किया। इस मंदिर का निर्माण कैलाश महामेरू प्रसाद शैली के आधार पर किया गया है। मंदिर के शिखर का स्वर्ण कलश करीब 400 किलोग्राम का है। सोमनाथ मंदिर गुजरात के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है। जिसे देखने के लिए प्रतिवर्ष 1 करोड़ से ज्यादा लोग देश विदेश से यहां पर आते है। सावन एवं कार्तिक पूर्णिमा के समय यहां पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है।

सोमनाथ समुद्री तट (Somnath Beach):

सोमनाथ का समुद्री तट दूसरा सबसे अच्छा पर्यटक स्थल है। अरब सागर की ठंडी हवा और शांत वातावरण दिन भर की थकान दूर करने के लिए काफी है। यहां पर तैराकी करना मना है क्योंकि यहां अरब सागर की लहरें काफी तेज होती है। लेकिन रेत में घूमते हुए आप सागर की लहरों का आनंद ले सकते है या फिर ऊंठ की सवारी कर सकते है। पिकनिक मनाने व शांति प्रिय लोगो के लिए यह उत्तम स्थान है।

सोमनाथ समुद्री तट वेरावल शहर के समीप में स्थित है। अगर आप वाटर स्पोर्ट्स का आनंद लेना चाहते है तो आप अहमदपुर मांडवी जा सकते है। यह दीव के समीप स्थित है।

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रुद्रेश्वर मंदिर (Rudreshwar Temple):

रुद्रेश्वर मंदिर सोमनाथ मंदिर के पास में ही स्थित है, लेकिन पूरी तरह से बर्बाद हो जाने के कारण अब सिर्फ खंडहर ही बचा है। रुद्रेश्वर महादेव मंदिर के खंडहर, दीवारे और मूर्तियों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समय का सोमनाथ मंदिर कैसा रहा होगा।

त्रिवेणी घाट (Triveni Sangam Ghat):

शहर से लगभग 2 किमी की दूरी पर त्रिवेणी घाट है। जहाँ पर हिरण्या, सरस्वती और कपिला नदी का संगम होता है। सबसे पहले कपिला का संगम सरस्वती में होता है। उसके बाद सरस्वती का संगम हिरण्या नदी में। जिसके बाद हिरण्या नदी अरब सागर में मिल जाती है। त्रिवेणी घाट जाने से पहले रास्ते मे ब्रह्मकुंड मिलता है। जहां पर ब्रह्मेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। इसके बाद आदिप्रभास और जलप्रभास दो कुंडों के दर्शन होते है।

ऐसा कहा जाता है कि त्रिवेणी घाट पर स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते है और वो मोक्ष को प्राप्त करता है।

पंच पांडव गुफा (Five Pandav Cave):

पंच पांडव गुफा का निर्माण सन 1949 में बाबा नारायणदास द्वारा करवाया गया था। इस गुफा में एक मंदिर है जो पांडवो को समर्पित है। इसीलिए इसे पंच पांडव गुफा कहते है। पांडवो के अलावा यहां भगवान शिव, देवी दुर्गा और राम परिवार की भी मूर्तिया है।

पंच पांडव गुफा सोमनाथ के लालघाटी में स्थित है। जहाँ से आप पूरे शहर का नजारा देख सकते है।

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सूरज मंदिर व सूर्य मंदिर (Sun Temple):

सूरज मंदिर भी त्रिवेणी घाट के समीप स्थित है। यहां पर सूर्य भगवान की पूजा की जाती है। यह भी सूर्य भगवान के प्रमुख मंदिरों में से एक है। सूरज मंदिर की वास्तुकला अद्भुत है। मंदिर में शेर, हाथी एवं अन्य कई पशुओ के चित्रण है। इस मंदिर को देख कर ऐसा प्रतीत होता है कि पहले के लोग प्रकृति के उपासक थे।




ऐसा कहा जाता है कि सूर्य मंदिर और सोमनाथ मंदिर एक ही समय का है। महमूद गज़नी के आक्रमण के कारण इसकी पौराणिक विरासत नष्ट हो गयी। जिसकी वजह से यह स्पष्ट नही कहा जा सकता कि यह मंदिर कितना पुराना है।

सूर्य मंदिर के समीप में ही एक गुफा है। जहाँ गुफा में हिंगलाज भवानी और महादेव सिद्धनाथ का मंदिर है। ऐसा कहा जाता है कि बलदेव जी ने यही पर शेषनाग रूप धारण किया था और पाताल को चले गए थे।

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भलका तीर्थ (Bhalka Teerth):

भलका तीर्थ भी त्रिवेणी घाट से कुछ ही दूरी पर स्थित है। यहाँ पर पुराना बरगद का पेड़ है, जो की भगवान कृष्ण को समर्पित है। ऐसा कहा जाता है की इसी पेड़ के नीचे भगवान कृष्ण शिकारी के बाण से घायल हो गए थे क्यूंकि शिकारी ने उनके पैर को हिरन समझ कर बाण चला दिया था। ऐसी मान्यता है की यही से द्वापर युग का अंत हुआ था।

देहोत्सर्ग तीर्थ (Dehotsarg Teerth):

देहोत्सर्ग तीर्थ भी त्रिवेणी घाट के समीप स्थित है। ऐसा कहा जाता है की भलका तीर्थ में तीर लगने से घायल होने के बाद भगवान् कृष्ण इसी जगह पर आये थे और यही से भगवान् कृष्ण अंतर्ध्यान हो गए थे। यहाँ आने वाले यात्रियों एवं श्रद्धालुओं में इस जगह की बड़ी मान्यता है। देहोत्सर्ग तीर्थ में वल्लभाचार्य जी की बैठक है जहा पर त्रिवेणी माता, भगवान राम, भगवान् कृष्ण, महाकालेश्वर आदि के मंदिर है। देहोत्सर्ग तीर्थ से आगे कुछ ही दूरी पर है यादवस्थली है। ऐसा कहा जाता है की भगवान कृष्ण के अंतर्ध्यान होने के बाद यादव इसी जगह पर आपस में लड़ कर नष्ट हो गए थे।

अहिल्याबाई मंदिर, परशुराम मंदिर, जूनागढ़ गेट एवं अन्य कई मंदिरो का इतिहास भी काफी पुराना है। सना गुफा भी घूमने के लिए काफी अच्छी जगह है, जहा पर पहाड़ो में छोटी छोटी गुफाये बनी हुयी है।

सोमनाथ में रुकने के लिए कई होटल्स, धर्मशाला इत्यादि आराम से मिल जाती है। यहाँ पर पुर्तगाली एवं भारतीय दोनों तरह के व्यंजनों का लुफ्त अपने सफर के दौरान उठा सकते है।

सोमनाथ के आसपास घूमने की जगह ( Other Tourist Places Near Somnath):

सोमनाथ के आसपास कई अन्य पर्यटक स्थल है, जहां पर घूमने के लिए आराम से जाया जा सकता है। ट्रांसपोर्ट बस व कैब करके इन जगहों तक आराम से पहुंचा जा सकता है।

  • दीव
  • जूनागढ़
  • गिरनार
  • गिरनार नेशनल पार्क
  • द्वारका

सोमनाथ कैसे पहुंचे (How To Reach Somnath):

सड़क, रेल व हवाई मार्गो द्वारा सोमनाथ तक आराम से पहुंचा जा सकता है। सड़क मार्ग से सोमनाथ तक आने के लिए यात्रियों को किसी भी तरह की परेशानी नही उठानी पड़ेगी।

सोमनाथ आने के लिए वेरावल सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है। वेरावल से सोमनाथ की दूरी मात्र 6 किमी की है।

हवाई मार्ग से सोमनाथ आने के लिए सबसे नजदिकी एयरपोर्ट केशोद में है। जो कि सोमनाथ से 53 किमी की दूरी पर है।

सोमनाथ यात्रा पर हमारा ये आर्टिकल आपको कैसा लगा, हमे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताये। आप हमे info@talkfromheart.in पर मेल करके भी अपने सुझाव हम तक भेज सकते है।

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