तीन तलाक़ पर रोक लगाने वाला मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन बिल संसद में पेश

तीन तलाक़ पर रोक लगाने वाला मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन बिल संसद में पेश

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तीन तलाक़ पर रोक लगाने वाला मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन बिल संसद में पेश

आखिरकार आज केंद्र सरकार ने तीन तलाक़ पर रोक लगाने वाले विधेयक “मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज” को लोकसभा में कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद द्वारा पेश किया गया।

जैसा कि हम सभी जानते है कि सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की बेंच में से 2 ने केंद्र सरकार को तीन तलाक़ पर कानून बनाने के लिए 6 महीने का समय दिया था। इसी के तहत आज गुरुवार को केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने तीन तलाक़ ( तलाक़ ए बिद्दत ) को आपराधिक श्रेणी में रखते हुए लोकसभा में विधेयक को पेश किया।

AIMIM, TMC, RJD, BJD जैसे सभी विपक्षी दलों ने इस पर विरोध दर्ज किया। विपक्षी दलों के नेताओ द्वारा कहा गया कि इससे मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय को और बढ़ावा मिलेगा। AIMIM प्रमुख ओवैसी ने सबसे पहले इस विधेयक पर विरोध किया।




कानून मंत्री ने इस विधेयक को लोक सभा मे पेश करते हुए कहा कि यह विधेयक किसी धर्म, मजहब से जुड़ा हुआ नही होगा बल्कि महिलाओ के सम्मान और गरिमा के लिए है। इससे किसी भी तरह से शरीयत में दखल नही होगा। आज का दिन सदन के लिए ऐतिहासिक दिन है, जिसमे मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए इस विधेयक को पेश किया जा रहा है।

कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कई इस्लामिक देशो का उदाहरण देते हुए कहा कि तलाक़ ए बिद्दत को हमने आपराधिक श्रेणी में रखा है। अगर कोई भी तीन तलाक़ देगा तो उसे अपराध मानते हुए जेल भेजा जाएगा। जिसके बाद उसे परिवार को मुआवजा देना होगा। इस कानून की अवहेलना करने पर सिर्फ मजिस्ट्रेट के द्वारा ही जमानत संभव हो पाएगी।

AIMIM प्रमुख ओवैसी ने इस विधेयक को मौलिक अधिकारों का हनन बताया । वही दूसरी तरफ केंद्र में राज्यमंत्री एम जे अकबर ने कहा मुस्लिम होने के नाते मैं यह कह सकता हु की इस विधेयक को लेकर कई प्रकार के दुष्प्रचार किये जा रहे है की इससे इस्लाम खतरे में होगा, मुस्लिम महिलाओं के प्रति अन्याय बढ़ेगा। लेकिन मैं कह सकता हु की इससे इस्लाम नही बल्कि मुस्लिम मर्दो की आज़ादी खतरे में होगी।

कांग्रेस ने इस विधेयक का विरोध नही किया लेकिन कहा कि इसकी कुछ कमियों को दूर करने के लिए विधेयक को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए।

तमाम विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद सरकार ने इसे महिलाओ के सम्मान, न्याय और लैंगिक समानता को आधार मानते हुए सभी विरोध को सिरे से खारिज कर दिया और इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया।

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