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Padmavati film को लेकर राजपूत हो रहे indian politics का शिकार

Padmavati film को लेकर राजपूत हो रहे indian politics का शिकार

Rani Padmavati पर बनी film को लेकर दिन पर दिन विवाद बढ़ता ही जा रहा है। निर्माता एवं निर्देशक संजय लीला भंसाली इससे पहले भी Padmavati film निर्माण के दौरान राजपूतो का विवाद झेल चुके है। आइये Padmavati film को लेकर हो रहे विवाद को समझते है।

राजपूतो के विभिन्न संगठनों द्वारा इस film का विरोध किया जा रहा है। विरोध करने में सबसे ऊपर करणी सेना का नाम है। करणी सेना के समर्थकों द्वारा संजय लीला भंसाली को इतिहास से खिलवाड़ करने वाला और देशद्रोही बताया जा रहा है और करणी सेना द्वारा कहा गया है कि अगर कोई निर्माता निर्देशक हमारी माता Padmavati का अपमान या राजपूतो के इतिहास के साथ छेड़छाड़ करेगा, तो हम उसे बर्दाश्त नही करेंगे।

Film release से पहले निर्माता निर्देशक संजय लीला भंसाली ने कहा कि इस film में Padmavati व राजपूतो का किसी भी तरह से अपमान नही किया गया है। संजय लीला भंसाली के समर्थन में Bollywood के कई अभिनेता, निर्माता एवं निर्देशक उनके साथ है।

इससे पहले कई निर्माता निर्देशक की साझा press confrence के दौरान यह कहा गया कि film को पास करना व बैन करने का अधिकार सेंसर बोर्ड के पास है। इसी के साथ Padmavati film की अभिनेत्री Deepika Padukone ने भी कहा को film जरूर release होगी और फ़िल्म को बैन करने का अधिकार सिर्फ सेंसर बोर्ड के पास है।

Deepika के इस बयान के बाद कई राजपूत संगठनों ने deepika की नाक काटने तक की धमकी दे डाली। इस बढ़ते विवाद में कई बड़े राजनेताओ की प्रतिक्रिया भी आने लगी है। राजनीतिक पार्टियां इस चुनावी समर में इस विवाद को और बढ़ा बना कर राजनीतिक फायदा देख रही है।

हम सभी जानते है कि वर्तमान में हिमांचल में चुनाव हुए और आगामी कुछ दिनों में गुजरात और अगले साल राजस्थान में चुनाव है। बढ़ते विरोध को देखते हुए सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी के नेता भी राजपूतो के विरोध में हा में हां मिला रहे है तो वही कांग्रेस ने इस विवाद में चुप्पी साध रखी है।

भौगोलिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश और गुजरात की सीमा राजस्थान से लगती है एवं चुनावी दृष्टि से इन क्षेत्रों में राजपूत वोटरों की अच्छी संख्या है। इस लिए राजनीतिक पार्टियों द्वारा राजपूत संगठनों को आगे कर धुर्वीकरण की राजनीति की जा रही है।

समझने की बात है कि इस समय जब film का सिर्फ preview ही जारी किया है तो विरोध कैसा। जबकि film को अभी तक किसी के द्वारा देखा तक नही गया है।फिर क्यों सभी संगठन व राजनेता इस film का विरोध कर रहे है और आखिर किस बात पर। अगर film में कोई गलत चीज़ दिखाई जाती है तो उसका विरोध film release के दिन भी किया जा सकता है।

इसका सीधा मतलब गुजरात व राजस्थान में आने वाले चुनाव को लेकर है की किस तरह से राजपूत और मुस्लिम वोटरों का ध्रुवीकरण किया जा सके।

भारतीय इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर किसी की भावना को आहत करना गलत है, लेकिन उसके लिये पहले हमें उस विषय को अच्छे से समझना भी जरूरी है।

Padmavati film देखकर ही हम इस बात को समझ सकते है कि इस film में इतिहास के साथ किसी तरह की कोई छेड़छाड़ की गई है या नही। अब ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा कि film 1 दिसंबर को release होती है या नही। लेकिन इन सबसे एक बात तो तय है की संजय लीला भंसाली निर्देशित Film Padmavati को free promotion मिल रहा।

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